इन दिनों अलग-अलग तरह की गंभीर बीमारियां सामने आ रही हैं, अब कश्मीर और महाराष्ट्र (Kashmir And Maharashtra) में रहस्यमयी बीमारियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, कश्मीर के राजौरी जिले के बधाल गांव (Jammu Kashmir News) में एक रहस्यमयी बीमारी से मौतें हो रही हैं, दूसरी तरफ पुणे में भी एक ऑटो इम्यून बीमारी आफत बनी है. राजौरी में रहस्यमयी बीमारी से अब तक कई मौतें हो चुकी हैं. वहीं पुणे में फैल रही ऑटो इम्यून (Autoimmune Disease) बीमारी लोगों के पैरों की ताकत (Mysterious Diseases) तक छीन ले रही है. इन बीमारियों ने प्रशासन और सरकार की टेंशन बढ़ा दी है...
जम्मू-कश्मीर में अब तक 17 लोगों की जा चुकी है जान
जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के राजौरी में एक ही गांव में कई लोगों की मौत की खबर सामने आई है, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गांव में पिछले 2 महीने से अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है. बताया जा रहा है कि मौत का सिलसिला एक शादी समारोह से शुरू हुआ और अब बारी-बारी से मौतें हो रही हैं. बता दें कि गांव में अलर्ट जारी कर दिया गया है.
खबरों की मानें तो राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में पता चला है कि मृतकों के सैंपल में कुछ न्यूरोटॉक्सिन (Neurotoxin) मिले हैं. प्रशासन ने बुधवार को इसे कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया है और अब गांव में सभी तरह की सभाओं पर रोक लगा दी गई है.
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न्यूरोटॉक्सिन क्या है?
यह एक तरह का केमिकल है, जो दिमाग और नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और यह खाने, हैवी मेटल्स, कीटनाशक, किसी जीव के काटने या अन्य तरीकों से शरीर में पहुंच सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक इससे कई जानलेवा बीमारियां जन्म ले सकती हैं. ऐसी स्थिति में सिरदर्द, चक्कर आना, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. इसके कारण याददाश्त और एकाग्रता में कमी, मूड स्विंग, तनाव, पाचन गड़बड़ी, त्वचा और बालों की समस्याएं हो सकती हैं.
महाराष्ट्र में GBD का कहर
वहीं महाराष्ट्र के पुणे के में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (Guillain Barre Syndrome) ने चिंता बढ़ा दी है, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संदिग्ध मामले बढ़कर 59 हो चुके हैं. बता दें कि यह एक दुर्लभ ऑटोइम्यून विकार है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसी स्थिति में इम्यून सिस्टम ही नसों पर अटैक करने लगता है. जिसका इसका असर मांसपेशियों पर पड़ता है. इसके कारण कमजोरी महसूस होती है और कुछ मामलों में हाथ-पैर भी सुन्न हो सकते हैं. इतना ही नहीं गंभीर स्थिति में लकवा भी लगने का खतरा रहता है.
कैसे करें बचाव?
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम अक्सर एक संक्रमण के बाद विकसित होती है, ऐसी स्थिति में संक्रमण से बचाव करने की कोशिश करें. इसके लिए हाथों को नियमित रूप से धोएं, खांसी और छींक के समय मुंह और नाक को ढकें, संक्रमित लोगों से दूर रहें. बता दें कि फ्लू और हेपेटाइटिस ए जैसे टीकों से इंफेक्शन का खतरा कम हो सकता है. इस बीमारी से दूर रहने के लिए हेल्दी डाइट लें और नियमित तौर पर जांच कराएं.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर्स से संपर्क करें.)
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Mysterious Diseases
Mysterious Diseases: कश्मीर और महाराष्ट्र में रहस्यमयी बीमारियों का कहर, इस गांव में लॉकडाउन जैसे हालात