पिछले कुछ दिनों में पुणे के अस्पतालों में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है. इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जीबीएस के कारण कुल 59 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इनमें से 12 मरीज वेंटिलेटर पर इलाज ले रहे हैं. इन मरीजों में बच्चों से लेकर 80 साल तक की उम्र के लोग शामिल हैं.

पुणे के एक अस्पताल में भर्ती तीन मरीज पेट में संक्रमण के कारण लकवाग्रस्त हो गए. एक उच्च गुणवत्ता वाला पीसीआर परीक्षण किया गया और मल में कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया पाया गया. सभी तीन मरीज चल रहे जीबीएस प्रकोप का हिस्सा हैं, जिसमें एक मरीज वेंटिलेटर पर है. 

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

पुणे अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डाॅ. सुधीर कोठारी ने मीडिया को बताया कि एक महीने में इस बीमारी के एक या दो मामले आना सामान्य बात है. लेकिन एक सप्ताह में 26 मरीज चिंता का विषय है और इसके कारण की जांच की जानी चाहिए. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने इसके पीछे गंदा और दूषित पानी होने की आशंका जताई है. सभी मरीज आसपास के इलाके

गुइलेन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) क्या है?

यह एक दुर्लभ बीमारी है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह कुछ बैक्टीरिया और वायरस के कारण होती है. इनमें कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया सबसे आम माना जाता है. गुइलेन-बैरे सिंड्रोम में, प्रतिरक्षा प्रणाली परिधीय तंत्रिका तंत्र को नष्ट करना शुरू कर देती है. क्योंकि इस जीवाणु में तंत्रिका तंत्र जैसी विशेषताएं होती हैं.

 

क्या लक्षण हैं?

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम कमजोरी, झुनझुनी या पक्षाघात का कारण बन सकता है. इसकी शुरुआत हाथों और पैरों से होती है. हालाँकि, पक्षाघात चेहरे और छाती तक फैल सकता है. इस संक्रमण के कारण पेट में दर्द, दस्त, उल्टी, मतली आदि लक्षण पहले दिखाई दे सकते हैं. वर्तमान में, बैक्टीरिया मल से प्रतीत होता है. बताया जा रहा है कि पुणे में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है

ठीक से पका हुआ चिकन और मटन खायें

कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया अक्सर मुर्गी और मवेशियों जैसे मुर्गियों और मटन के पाचन तंत्र में पाए जाते हैं. यह उनके मल के संपर्क से भी फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इन जीवाणुओं के फैलने का सबसे आम तरीका संक्रमित जानवरों का अधपका मांस या दूध पीना है. इन चीजों को ठीक से पकाने से ये कीटाणु मर जाते हैं.

डॉक्टर क्या कहते हैं? 

डॉ. सुधीर कुमार ने अपने ट्वीट में कहा कि इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है. अगर जल्दी इलाज किया जाए तो 95 प्रतिशत लोग पूरी तरह ठीक हो सकते हैं. हालाँकि, मांसपेशियों को फिर से ताकत हासिल करने और पक्षाघात दूर होने में कुछ समय लग सकता है.

WHO के मुताबिक ये बीमारी जानलेवा हो सकती है. इसका कोई अलग इलाज नहीं है. लेकिन शीघ्र अस्पताल में भर्ती होने के बाद उसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है. रोगी की हृदय गति, रक्त के थक्के और रक्तचाप में गंभीर परिवर्तन खतरनाक हो सकता है.

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर्स से संपर्क करें.)

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GBS bacteria entered the stomach from mutton and chicken, 59 people admitted to hospital in Pune, 12 on ventilator, some got paralyzed
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मटन-चिकन से पेट में गया जीबीएस बैक्टिरिया, पुणे में 59 लोग की जान पर आफत
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मटन-चिकन खाकर लोग पुणे में हुए बीमार
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मटन-चिकन खाकर लोग पुणे में हुए बीमार

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मटन-चिकन से पेट में गया जीबीएस बैक्टिरिया, पुणे में 59 लोग की जान पर आफत

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