Urinary Tract Infections: यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई महिलाओं में एक कॉमन हेल्थ कंसर्न है, तकरीबन आधी महिलाओं को अपनी जिंदगी में कम से कम एक संक्रमण का अनुभव होता है. अक्सर मामूली परेशानी के तौर पर खारिज कर दिए जाने वाले यूटीआई, अगर बिना इलाज किए छोड़ दिए जाते हैं, तो खास तौर से जब वो किडनी इंफेक्शन में बदल जाते हैं, तो लॉन्ग टर्म इफेक्ट डाल सकते हैं. महिलाओं की अनूठी शारीरिक रचना उन्हें इन संक्रमणों के लिए अधिक संवेदनशील बनाती है, जिससे गुर्दे की सेहत की हिफाजत में अवेयरनेस और निवारक प्रिवेंटिव केयर अहम हो जाता है.
महिलाएं ज्यादा रिस्क में क्यों हैं?
नेफरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ पोखरियाल (Dr. Saurabh Pokhariyal) ने बताया कि महिलाओं में यूटीआई और किडनी इंफेक्शन की बढ़ी हुई व्यापकता में महिला शारीरिक रचना एक अहम भूमिका निभाती है. मूत्रमार्ग (यूरेथरा) वो ट्यूब जो यूरिन को शरीर से बाहर ले जाती है, इसका आकार महिलाओं में पुरुषों की तुलना में छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया के बाहरी जननांगों से ब्लैडर तक जाना आसान हो जाता है. एक बार जब बैक्टीरिया मूत्राशय में प्रवेश कर जाते हैं, तो वे गुर्दे तक पहुंच सकते हैं, जिससे ज्यादार गंभीर संक्रमण हो सकते हैं.
बार-बार होने वाले यूटीआई गुर्दे के संक्रमण के खतरे को और बढ़ा देते हैं. स्टडी से पता चलता है कि जिन महिलाओं को एक यूटीआई का एहसास होता है, उनमें से तकरीबन 25-30 फीसदी को बार-बार इंफेक्शन होने की आशंका होती है. बार-बार होने वाले बैक्टीरियल अटैक यूरिनरी ट्रैक्ट को कमजोर कर सकते हैं और लॉन्ग टर्म सूजन का कारण बन सकते हैं, जिससे अगर संक्रमणों का ठीक से मैनेज नहीं किया जाता है तो किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है.
यूटीआई के लक्षण
गुर्दे के संक्रमण, या पायलोनेफ्राइटिस, लोअर यूटीआई की तुलना में ज्यादा गंभीर लक्षण पैदा कर सकते हैं. कॉमन वॉर्निंग साइन में बुखार, ठंड लगना, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, मतली और बार-बार पेशाब आना शामिल हैं. अगर इसे बिना इलाज के छोड़ दिया जाता है, तो गुर्दे के संक्रमण गुर्दे के फोड़े या यहां तक कि पर्मानेंट रीनल डैमेज जैसे कॉम्पलिकेशंस का कारण बन सकते हैं.
लॉन्ग टर्म हार्म को रोकने के लिए जल्दी डायग्नोसिस और इलाज जरूरी है. हालांकि, कई महिलाएं अपने लक्षणों की गंभीरता को अनदेखा कर सकती हैं या मेडिकल केयर में देरी कर सकती हैं, एक ऐसी चूक जिसका उनके गुर्दे की सेहत पर स्थायी परिणाम हो सकता है.
प्रिवेंशन है जरूरी
यूटीआई और किडनी के इंफेक्शन को रोकना आसान लेकिन प्रभावी आदतों से शुरू होता है. हाइड्रेटेड रहना, अच्छी हाइजीन की प्रैक्टिस करना और इंटरकोर्स के बाद पेशाब करना इंफेक्शन के खतरे को काफी कम कर सकता है. बार-बार होने वाले यूटीआई से ग्रस्त महिलाओं को क्रैनबेरी सप्लीमेंट या प्रोबायोटिक्स से भी फायदा हो सकता है, जो यूरिनरी ट्रैक्ट की सेहत को बढ़ावा दे सकते हैं.
रेगुलर हेल्थ चेकअप भी समान रूप से जरूरी हैं, खासकर बार-बार इंफेक्शन की हिस्ट्री वाली महिलाओं के लिए. शुरुआती इलाज मामूली संक्रमणों को किडनी के कॉम्पलिकेशंस में बदलने से रोक सकता है. डिसकंफर्ट के पहले इशारे पर डॉक्टर से सलाह लेना वक्त पर इलाज को सुनिश्चित करता है और लंबे समय में गुर्दे की सेहत की हिफाजत करता है.
जागरूकता जरूरी
यूटीआई की बढ़ते खतरे के बावजूद, गुर्दे की सेहत पर उनके संभावित असर के बारे में अक्सर जागरूकता की कमी होती है. महिलाओं के यूरोलॉजिकल हेल्थ के बारे में चुप्पी तोड़ना वक्त पर डायग्नोसिस और प्रिवेंटिव केयर को प्रोत्साहित करने के लिए जरूरी है. शिक्षा और खुली बातचीत महिलाओं को अपने किडनी की हेल्थ की सेफ्टी के लिए सक्रिय कदम उठाने के लिए सशक्त बना सकती है.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)
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