कारपोरेट जगत में जॉब करने से उद्यमी बनने तक असम के इंजीनियर प्रज्ञान कुमार रॉय की कहानी बेहद दिलचस्प है. फिलहाल वह राष्ट्रपति भवन के बुलावे पर अपने चाय के स्वाद का लोगों को दीवाना बना रहे हैं. असम के सोरभोग में बेकी नदी के किनारे पले-बढ़े 45 वर्षीय इस शख्स को राष्ट्रपति भवन ने अपने अमृत उद्यान में चाय की दुकान लगाने के लिए चुना है जिनकी सराहना असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी की.

यह भी पढ़ें- रात के अंधेरे में क्यों चमकती हैं जानवरों की आंखें? ये है साइंटिफिक कारण

सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने की तारीफ
सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने एक्स पर पोस्ट किया, 'सोरभोग से अमृत उद्यान तक. प्रज्ञान रॉय ने रिवरबेकी चाय के माध्यम से पूरे भारत में असली असम चाय के अनुभव को फैलाने के लिए 18 साल के कारपोरेट जॉब को छोड़ दिया. उनकी चाय अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई है. यहां उन्हें एक स्टॉल लगाने के लिए आमंत्रित किया गया है. यह वाकई प्रेरणादायक है.'

यह भी पढ़ें- कौन हैं UPSC के फेमस टीचर विकास दिव्यकीर्ति की वाइफ? डिग्रियों के मामले में नहीं हैं पति से कम

यहां से की है इंजीनियरिंग
गुवाहाटी के असम इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले रॉय ने भारत में लगभग सभी चॉकलेट और पेय उद्योगों में 18 साल तक काम करने के बाद 2018 में अपने ब्रांड 'रिवरबेकी कार्पे डिएम' की स्थापना की. इस साल जनवरी में उन्होंने अमृत उद्यान में एक चाय की दुकान के लिए आवेदन किया था जिसके लिए उन्हें अनुमति भी मिल गई है. यह स्टॉप 1 फरवरी से खुला है और 31 मार्च तक आगंतुक उनकी चाय की चुस्कियों का लुत्फ उठा पाएंगे.

यह भी पढ़ें- RBI में जॉब के साथ बिना कोचिंग क्रैक की UPSC, जानें IAS सृष्टि डबास के हौसले को कैसे मिली उड़ान

माता-पिता है टीचर
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में रॉय ने बताया, 'असम चाय हर जगह बिकती है लेकिन मुझे इसका असली स्वाद नहीं मिला क्योंकि यह ज़्यादातर मिलावटी होती है. असम चाय को कोई कानूनी संरक्षण नहीं मिला है. अगर हम असम चाय खुद तैयार नहीं करेंगे और लोगों को इसे नहीं पिलाएंगे तो उन्हें इसका स्वाद और लाभ कभी नहीं मिलेगा. अगर हम उन्हें इसका असली स्वाद नहीं दे सकते तो वे असम चाय क्यों खरीदें. मैंने सोचा कि मुझे इसके लिए काम करना चाहिए. इसके बहुत खरीदार हैं और उन्होंने मुझे प्रोत्साहित किया और इस तरह से मेरी यात्रा शुरू हुई.'

शिक्षक माता-पिता के घर जन्मे रॉय ने कहा कि 'मुझे गर्व है कि राष्ट्रपति भवन ने मुझे अमृत उद्यान में जगह दी. अगर असम के लोग प्रेरित होकर वही करेंगे जो मैं कर रहा हूं तो यह एक आंदोलन बन जाएगा.'

ख़बर की और जानकारी के लिए डाउनलोड करें DNA App, अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें  हमारे गूगलफेसबुकxइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

Url Title
once a mechanical engineer now serving Assam tea in Rashtrapati Bhavan this is the unique journey of Pragyan Kumar Roy from job to business
Short Title
कभी थे मैकेनिकल इंजीनियर अब राष्ट्रपति भवन में पिला रहे असम चाय, यूं रहा जॉब से
Article Type
Language
Hindi
Section Hindi
Page views
1
Embargo
Off
Image
Image
Pragyan Roy
Caption

Pragyan Roy

Date updated
Date published
Home Title

कभी थे मैकेनिकल इंजीनियर अब राष्ट्रपति भवन में पिला रहे असम चाय, यूं रहा जॉब से बिजनेस तक का अनोखा सफर

Word Count
534
Author Type
Author