ओडिशा के बारीपदा से ताल्लुक रखने वाली आयुषी प्रधान यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल हुईं प्रेरणादायक शख्सियतों में से एक हैं. महज 26 साल की उम्र में आयुषी ने यूपीएससी सीएसई 2023 में 36वीं रैंक हासिल कर अपनी खास पहचान बनाई है. वह देश की सबसे कम उम्र की महिला आईएएस अधिकारियों में से एक हैं. आज हम आपको आईएएस आयुषी प्रधान की सफलता की कहानी आपके साथ शेयर करेंगे.
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प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
2 दिसंबर 1997 को ओडिशा के मयूरभंज में जन्मी आयुषी प्रधान एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी जो पढ़ाई-लिखाई को काफी महत्व देता था. उनकी मां एक गृहिणी हैं जबकि उनके पिता बैंक मैनेजर हैं. माता-पिता ने हमेशा उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया. उनके परिवार ने उन्हें वह माहौल दिया जिससे वह जिंदगी में कुछ सार्थक मुकाम हासिल कर सकें और समाज की बेहतरी के लिए सकारात्मक योगदान दे सकें.
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शुरू से ही पढ़ाई में टॉपर रहीं आयुषी
आयुषी बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में आगे रहीं. उन्होंने सेंट एनीज़ कॉन्वेंट स्कूल से कक्षा 10 की परीक्षा में 93.5% अंक हासिल किए. इसके बाद उन्होंने 12वीं की पढ़ाई भुवनेश्वर के मदर्स पब्लिक स्कूल से की जहां उन्हें 93% मार्क्स मिले. इतने बेहतरीन मार्क्स से उनकी भविष्य की सफलताओं के लिए मंच तैयार हो रहा था. स्कूली पढ़ाई खत्म होने के बाद आयुषी ने भुवनेश्वर में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीईटी) में दाखिला लिया जहां उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. जहां उनके दोस्तों में इंजीनियरिंग में पारंपरिक करियर को चुना वहीं आयुषी की आकांक्षाओं ने अलग मोड़ लिया.
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एमबीए से यूपीएससी तक का सफर
जैसा कि इंजीनियरिंग के बाद अधिकतर स्टूडेंट्स करते हैं, आयुषी ने भी एमबीए की पढ़ाई करने की ओर रुख किया. हालांकि जैसे-जैसे वह अपने करियर में आगे बढ़ीं उन्हें एहसास हुआ कि उनका असली लक्ष्य को सिविल सेवा है.उन्होंने अपने एमबीए के सपने को पीछे छोड़ने का फैसला किया और यूपीएससी सीएसई की तैयारी पर ध्यान देने लगीं. आयुषी का यह फैसला आसान नहीं था लेकिन सिविल सेवाओं में अपना करियर बनाने का दृढ़ निश्चय किया ताकि समाज में प्रभावशाली योगदान दिया जा सके.
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तीन प्रयास, एक लक्ष्य
आयुषी की यूपीएससी यात्रा चुनौतियों से भरी हुई थी. अपने पहले प्रयास में वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंच गईं लेकिन कट-ऑफ से 13 अंकों के मामूली अंतर से चूक गईं. इस असफलता से विचलित हुए बिना आयुषी अपनी तैयारी में जुटी रहीं. अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 334वीं रैंक हासिल की और भारतीय रक्षा संपदा सेवा (IDES) के लिए सिलेक्ट हुईं. लेकिन आयुषी का लक्ष्य तो आईएएस बनना था.
अपने तीसरे प्रयास में आयुषी ने IDES की ट्रेनिंग के साथ ही फिर से UPSC परीक्षा दी. इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 36वीं रैंक हासिल कर आईएएस के लिए अपनी जगह पक्की कर की. आयुषी को यूपीएससी की तैयारी के प्रति उनका दृष्टिकोण सबसे अलग बनाता है. उन्होंने घर पर रहकर ही तैयारी करना चुना और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया. कंप्यूटर इंजीनियरिंग में अपनी पृष्ठभूमि के बावजूद आयुषी ने अपने वैकल्पिक विषय के रूप में मानव विज्ञान को चुना. उनकी कहानी यूपीएससी की प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता हासिल करने का लक्ष्य रखने वाले युवाओं के लिए उदाहरण पेश करती है और साबित करती है कि सही मानसिकता और दृष्टिकोण के साथ दुनिया की सबसे कठिन बाधाओं को भी पार किया जा सकता है.
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IAS Ayushi Pradhan
कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग के बाद MBA, फिर यूं 3 प्रयास में आयुषी प्रधान ने पूरी की IAS बनने की जिद