हर साल लाखों युवा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में अपने सपनों को साकार करने का सपना देखते हैं, लेकिन गिनती के कुछ ही इस कठिन परीक्षा को पार कर पाते हैं. बिहार के बांका जिले के छोटे से गांव लाहौरिया की अन्नपूर्णा सिंह ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और जुनून के सामने कोई बाधा मायने नहीं रखती. किसान पिता मुकेश सिंह और गृहिणी मां की बेटी अन्नपूर्णा ने तमाम मुश्किलों को पार कर UPSC की परीक्षा में सफलता हासिल की. साधारण परिवार की यह असाधारण बेटी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
नौकरी के साथ तैयारी
पटना में शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद अन्नपूर्णा ने इंजीनियरिंग के लिए बेंगलुरु का रुख किया. पढ़ाई में अव्वल अन्नपूर्णा को कैंपस प्लेसमेंट के जरिए प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई, लेकिन उनका सपना सिविल सेवा बनना था. नौकरी के साथ उन्होंने हर दिन करीब 9 घंटे की पढ़ाई जारी रखी. अपनी मेहनत और लगन से अन्नपूर्णा ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखकर अपने सपने को साकार करने की राह पर कदम बढ़ाया.
पहली सफलता से मिली प्रेरणा
यूपीएससी से पहले अन्नपूर्णा ने 66वीं बीपीएससी परीक्षा में 222वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा साबित की. यह सफलता उनके लिए एक नई प्रेरणा बनी. उन्होंने नौकरी के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और कड़ी मेहनत के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त की.
संघर्ष से मिली प्रेरणा
अन्नपूर्णा सिंह की सफलता उन युवाओं के लिए मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल हासिल करना नामुमकिन नहीं होता.
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IFS Annapurna Singh Success Story
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