डीएनए हिंदी: माइक्रोफाइबर प्रदूषण में सिंथेटिक कपड़ों का बहुत बड़ा योगदान है. एक निजी संस्थान Toxics Link द्वारा जारी की गई रिपोर्ट Dirty Laundry Threads of Pollution- Micro fibres में बताया गया है कि वाशिंग मशीन में कपड़े धोने के दौरान प्रति किलो धुले हुए कपड़ों में से 124 से 308 मिलीग्राम फाइबर निकलता है. यही नहीं, महासागरों में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा सिंथेटिक कपड़ों का है.

दुनिया भर में बढ़ता माइक्रोप्लास्टिक्स एक चिंता का विषय बना गया है. इसका अंजादा इसी बात से लाया जा सकता है कि यह आर्कटिक की बर्फ, वहां के समुद्री जल और तलछट में भी पाया गया है. वैज्ञानिकों ने शोध के बाद कहा है कि आर्कटिक के समुद्री जल में अधिकांश माइक्रोप्लास्टिक्स यूरोप और उत्तरी अमेरिका के घरों में कपड़े धोने के दौरान उनसे निकलने वाले पॉलिएस्टर के रेशों से बढ़ा है.

क्या है माइक्रोफाइबर?
माइक्रोफाइबर एक तरह का माइक्रोप्लास्टिक होता है. यह 5MM से कम होता है. पर्यावरण में माइक्रोफाइबर आने के पीछे- घरेलू लॉन्ड्री, कपड़ा और टायर उद्योग, प्लास्टिक की बोतलें और मछली पकड़ने के जाल आदि कारण शामिल हैं.

सिंथेटिक कपड़ों से फैल खतरा

 

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समुद्र में प्लास्टिक के कणों की एंट्री 
हमारी धरती और समुद्र में प्लास्टिक के कणों ने सबसे अधिक घुसपैठ की है. इन छोटे टुकड़ों को मछलियों के पेट से लेकर समुद्र की सबसे गहरी पहाड़ियों- मारियाना ट्रेंच- आर्कटिक समुद्री बर्फ में खोजा गया है. ओसियन वाइज कंजर्वेशन समूह और कनाडा के मत्स्य और महासागरों के विभाग द्वारा किए गए नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने आर्कटिक से समुद्री जल का नमूना लिया जिसमें 92 प्रतिशत सिंथेटिक फाइबर से बना माइक्रोप्लास्टिक्स पाया गया लेकिन सवाल बिल्कुल वही है कि यह प्लास्टिक प्रदूषण आ कहां से रहा है? 

शोधकर्ताओं ने क्या पाया?
ओसियन वाइज और ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता पीटर रॉस ने कहा कि इसमें से लगभग 73 प्रतिशत माइक्रोप्लास्टिक्स पॉलिएस्टर के रूप में पाया गया जो सिंथेटिक वस्त्रों से निकला है. यहां स्पष्ट निष्कर्ष यह है कि अब हमारे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका के घरों के कपड़ों को धोने से निकलने वाला अपशिष्ट जल के माध्यम से आर्कटिक प्रदूषित हो रहा है. पॉलिएस्टर, ऐक्रेलिक, नायलॉन और अन्य  सिंथेटिक सामग्री से बने परिधान में प्लास्टिक होता है और यह विश्व स्तर पर लगभग 60 प्रतिशत कपड़ों की सामग्री को दर्शाता है. सिंथेटिक कपड़ों की धुलाई और उपयोग के दौरान निकलने वाले माइक्रोफाइबर जल निकायों में मिल जाते हैं और उन्हें प्रदूषित करते हैं.

माइक्रोफाइबर

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माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण में क्या निकला?
शोधकर्ताओं ने माइक्रोप्लास्टिक्स की पहचान करने और उसे मापने के लिए माइक्रोस्कोपी विश्लेषण का उपयोग किया. इसे उन्होंने पांच मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के टुकड़े के रूप में परिभाषित किया. पश्चिम की तुलना में पूर्वी आर्कटिक में लगभग तीन गुना अधिक माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए हैं. शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि नए पॉलिएस्टर फाइबर अटलांटिक द्वारा क्षेत्र के पूर्व में फैलाए जा सकते हैं. ओशन वाइज ने वाशिंग मशीनों पर परीक्षण किए हैं और अनुमान लगाया है कि कपड़ों से बने सामान को सामान्य घरेलू रूप से धोने के दौरान उनमें से लाखों फाइबर निकल सकते हैं.

मानव शरीर को क्या नुकसान पंहुचा सकता है?
माइक्रोफाइबर प्रदूषण पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है. ये कण शरीर में Chemical Leaching को प्रेरित कर सकते हैं, शरीर  के  Defence Mechanism और आपके  Nervous System को  बाधित कर सकते हैं जिससे जन्मजात विकलांगता (Congenital Disability) हो  सकती  है साथ ही आपके टिशू को भी नुक्सान पंहुचा सकती है.

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Microfiber pollution spreading through synthetic fabrics risk of diseases like congenital disabilities
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सिंथेटिक कपड़ों से फैल रहा जन्मजात विकलांगता का खतरा, जानि
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माइक्रोफाइबर प्रदूषण
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सिंथेटिक कपड़ों से फैल रहा जन्मजात विकलांगता का खतरा, जानिए कैसे