Clean Yamuna Mission: भाजपा ने 27 साल बाद दिल्ली विधानसभा में सत्ताधारी के तौर पर वापसी की है. भाजपा नेताओं ने यमुना नदी को साफ-स्वच्छ बनाने का अपना चुनावी वादा पूरा करने का ऐलान किया है. इसकी शुरुआत भी की गई है. यमुना नदी में बड़ी-बड़ी मशीनें लग गई हैं. घाट पर पहुंचकर खुद नवनियुक्त मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नदी की आरती की है. भाजपा जानती है कि यह मुद्दा अगले कुछ सालों में उस पर सबसे ज्यादा सवाल खड़ा करने वाला है. साथ ही पार्टी यह भी जानती है कि दिल्ली में जिस यमुना नदी को पर्यावरण विशेषज्ञों ने मृत नदी मान रखा है, उसकी सफाई और उसे दोबारा जिंदा करना आसान कार्य नहीं है. सवाल उठता है कि क्या वास्तव में ऐसा संभव है? यदि वैश्विक उदाहरण देखे जाएं तो जवाब होगा- हां. दुनिया में कई ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें मृत घोषित हो चुकी नदी को दोबारा नया जीवनदान दिया गया है. लंदन की टेम्स नदी, जर्मनी में राइन, दक्षिण कोरिया में हान और अमरीका में मिलवॉकी नदी, इसका गजब उदाहरण है. भारत में भी राजस्थान में ऐरु नदी और अवारी नदी को दोबारा जिंदा किया जा चुका है.
इन सब नदियों में सबसे बड़ा उदाहरण लंदन की टेम्स नदी का माना जाता है, जिसकी गंदगी के कारण वहां कभी ब्रिटिश संसद तक को बंद करने की नौबत आ गई थी. आज इस नदी के साफ पानी का उदाहरण दिया जाता है. चलिए जानते हैं कि लंदन की टेम्स नदी कैसे एक नाले से दुनिया की सबसे साफ नदियों में बदल गई.
पहले जान लीजिए यमुना नदी के प्रदूषण की क्या है हालत?
यमुना नदी को दिल्ली की 'लाइफलाइन' कहा जाता था, क्योंकि देश की इस राजधानी के बसने का कारण ही यह नदी थी. पांडवों के इंद्रप्रस्थ से लेकर मुगलों की दिल्ली तक और फिर ब्रिटिश गुलामी के दौर में भी यमुना नदी में पीने और नहाने लायक पानी बहता था. शाहजहां ने लालकिला और चांदनी चौक बनाते समय खासतौर पर यमुना नदी का पानी यहां तक नहर के जरिये पहुंचने का इंतजाम किया था. उत्तराखंड में हिमालय के यमुनोत्री से निकलकर साफ पानी से भरपूर यमुना नदी आज दिल्ली में नाला बनकर रह गई है.
- दिल्ली में यमुना नदी 22 किलोमीटर दूरी तय करती है. इस दौरान उसमें 122 छोटे-बड़े नाले गिरते हैं.
- यमुना नदी के उद्गम से प्रयागराज में गंगा में संगम करने तक की कुल गंदगी का 76% हिस्सा दिल्ली से इसमें मिलता है.
- दिल्ली में रोजाना 712 मिलियन गैलन गंदगी में से 607.1 मिलियन गैलन शोधित होती है. शेष 184.9 मिलियन गैलन नालों से सीधे यमुना में गिरती है.
- यमुना नदी के पानी में फेकल कोलीफॉर्म लेवल 79,00,000 NPN है, जबकि यह 500 NPN प्रति 100ml से ज्यादा नहीं होना चाहिए.
- दिल्ली के 22 किलोमीटर के दायरे में यमुना नदी में अधिकतर जगह ऑक्सीजन शून्य है जबकि अमोनिया 8PPM (0.5PPM ही मान्य) तक है.
- यमुना नदी के गंदे पानी में पहाड़ों की बर्फ जैसा नजारा दिखाने वाले सफेद जहरीले झाग, इसमें शामिल फास्फेट व एसिड के कारण बनते हैं.
6,000 करोड़ रुपये खर्च, यमुना नदी आज भी गंदी
- यमुना एक्शन प्लान-1 की शुरुआत 1993 में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 21 शहरों की गई थी.
- 1993 से 2023 तक यमुना एक्शन प्लान के तीन चरण हो चुके हैं, जिन पर तकरीबन 3,850 करोड़ रुपये खर्च हुए, पर यमुना गंदी ही है.
- साल 2015 से 2023 के बीच अलग-अलग योजनाओं के तहत भी यमुना सफाई पर 2,100 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया गया है.
टेम्स नदी को क्यों मानना चाहिए यमुना नदी के लिए उदाहरण?
लंदन की टेम्स नदी आज दुनिया की सबसे साफ नदियों में गिनी जाती है, लेकिन साल 1858 में इसमें नाले से भी खराब पानी होने के कारण उसकी गंदी बदबू के कारण लंदन में ब्रिटिश संसद की कार्यवाही रोकनी पड़ी थी. साल 1957 में नेशनल हिस्ट्री म्यूजियम ने डेड रीवर घोषित कर दिया था यानी जिसके पानी में जीव-जंतु जिंदा नहीं रह सकते. दरअसल ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति के बाद सारा कचरा टेम्स नदी में ही डालना शुरू कर दिया गया. औद्योगिक क्रांति से नए शहर बने और पुराने शहर बड़े हुए तो उनका सीवेज भी टेम्स नदी में ही गिरने लगा. नतीजतन 1850 तक यह नदी जीवों के लिए मृत्यु कुंड बन गई. इसके बाद ऐसे कदम उठाए गए कि आज इस नदी का साफ पानी दूसरे देशों के लिए उदाहरण बन गया है.
कैसे साफ किया गया टेम्स नदी को?
टेम्स नदी को साफ करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कड़े कानून बनाए, जिसके तहत इसमें कचरा डालने वाले पर भारी-भरकम जुर्माना वसूलने का नियम बनाया गया. साथ ही इसमें गिरने वाले सीवेज व औद्योगिक कचरे की सफाई के लिए सिस्टम बनाने की जिम्मेदारी सिविल इंजीनियर जोसेफ बेजलगेट को दी गई. करीब 50 साल तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स बनाने का दौर चला. घरों में आधुनिक शौचालय बनाए गए.
मेहनत हुई बरबाद पर नहीं हारा ब्रिटेन
दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी के विमानों की लंदन पर बमबारी में यह सीवेज नेटवर्क बरबाद हो गया. इससे टेम्स नदी फिर से जहरीली हो गई. नतीजतन 1957 में इसे 'डेड रिवर' घोषित करना पड़ा. हालांकि ब्रिटेन ने इससे हार नहीं मानी. एक बार फिर सफाई अभियान शुरू किया गया. 1961 से 1955 के बीच फिर से कड़े कानून बनाकर लागू किए गए. 1976 में इसमें गिरने वाले सारे नाले बंद कर दिए गए. 1989 में ब्रिटिश सरकार ने राष्ट्रीय नदी प्राधिकरण बनाकर उसे टेम्स नदी की निगरानी की जिम्मेदारी दी.
- टेम्स नदी में बड़े ऑक्सीजनेटर बनाकर ऑक्सीजन लेवल बढ़ाया गया
- ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने से टेम्स नदी में मछली और दूसरे जीव पनपे, जो पानी के नेचुरल क्लीनर हैं.
- एक बार साफ होने के बाद अभियान रोका नहीं गया बल्कि इसके बाद भी लगातार जारी है.
- लंदन के सीवेज सिस्टम पर आबादी बढ़ने के कारण आए बोझ के चलते नया 'सुपर सीवर' बन रहा है.
- करीब 25 किलोमीटर लंबा सुपर सीवर साल 2025 तक पूरा हो जाएगा, जो 10 करोड़ से ज्यादा लोगों का बोझ संभाल पाएगा.
- टेम्स नदी में सफाई से जुड़े कड़े मानक आज भी लागू हैं. इनमें किसी भी तरह की ढील नहीं दी गई है.
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लंदन की टेम्स थी दुनिया की सबसे गंदी नदी, आज बहता है साफ पानी, क्या BJP लेगी यमुना नदी के लिए सीख?