उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत और राजस्थान के जयपुर में धन्नालाल सैनी की हत्या में एक ही जैसा पैटर्न दिखता है. दोनों ही मामलो में बेरहमी, असहिष्णुता, पाश्विक प्रवृत्ति और टॉक्सिक मर्दानगी दिखती है. सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने पति की हत्या प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर कर दी. वहीं, जयपुर मामले में भी पत्नी ने अपनी अपने पति की हत्या अपने प्रेमी के साथ मिलकर कर दी. अब चारों तरफ सवाल तैर रहे हैं कि आखिर ममता की मूरत कही जाने वाली स्त्रियां इतनी हिंसक क्यों होती जा रही हैं?
लंबे समय से लैंगिक समानता पर काम करने वाले समाजसेवक सतीश सिंह का कहना है कि मेरठ या जयपुर जैसी घटनाओं से मामला बहुत सामान्यीकृत नहीं किया जा सकता. हत्या में केवल महिला शामिल नहीं है बल्कि एक पुरुष भी शामिल है. दूसरा समाज में जिस तरह की टॉक्सिक मर्दानगी बढ़ गई है, हिंसा का सामाजीकरण कियार जा रहा है, ऐसे में वही हिंसा महिला नहीं करेगी, इसकी अपेक्षा नहीं की जा सकती.
महिलाएं जब पुरुषों जैसा बनने की कोशिश करती हैं तो उनके हिंसा के तरीके भी अपनाती हैं. जो तरीके पुरुष अपनाते रहे हैं उसे महिला भी अपना सकती है और इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए. ऐसे में सिर्फ ये कहना है कि महिलाएं हिंसक होती जा रही हैं, ये सिर्फ उन्हें बदनाम करने की कोशिश है.
'महिलाएं जब पुरुषों जैसा बनने की कोशिश करती हैं तो उनके हिंसा के तरीके भी अपनाती हैं. ऐसे में सिर्फ ये कहना है कि महिलाएं हिंसक होती जा रही हैं, ये सिर्फ उन्हें बदनाम करने की कोशिश है. '
-सतीश सिंह, समाजसेवक, वाराणसी
मेरठ और जयपुर से पहले आपको याद दिला दें कि बेंगलुरु में अतुल सुभाष और आगरा में टीसीएस कंपनी में काम करने वाले मानव शर्मा की आत्महत्या के बाद भी महिलाओं पर पुरुषों की जान लेने के मुद्दे उठे थे. गौर करने वाली बात यह है कि यह सभी घटनाएं शादी के बाद हुई हैं. अब ऐसे में सवाल उठाए जा रहे हैं कि शादी चाहें अरेंज हो या लव, जान कभी भी जा सकती है. तो अब शादी करें या नहीं? करें तो कहीं मौत न हो जाए?
इन सवालों का जवाब देते हुए गुरुग्राम में मनोचिकित्सक डॉ. प्रज्ञा मलिक बताती हैं कि शादी के बाद पार्टनर्स एक दूसरे से बात नहीं कर पाते, या किसी का पहले से ही कोई एक्स रहा है तो उससे बाहर नहीं निकल पाते, बहुत से लोग अपने गुस्से को मैनेज नहीं कर पाते, अपने तनाव को मैनेज नहीं कर पाते, एंटी-सोशल पर्सनालिटी होने की वजह से, बचपन में मां-पिता से प्यार न मिलने के कारण, पति-पत्नी के बीच स्वामित्व का सवाल जैसे कारण शादी के बाद क्रूरता को बढ़ा सकते हैं.
'शादी के बाद पार्टनर्स के बीच हिंसा उनकी बचपन में पैरेंटिंग की कमी, एंटी-सोशल बिहेवियर और स्वामित्व की लड़ाई के चलते भी बढ़ जाती है. '
-डॉ. प्रज्ञा मलिक, साइकोलॉजिस्ट, गुरुग्राम
इसके अलावा मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी का कहना है कि मेरठ केस जैसे मामलों में आरोपियों को मनोरोग कहकर छोड़ देना भी सही नहीं है क्योंकि आरोपी हमेशा मानसिक रोगी ही हो. मानसिक रोगों को ग्लोरिफाई नहीं किया जाना चाहिए. मानसिक रोग की आड़ में कोई हत्यारा सजा से बच जाए ये भी ठीक नहीं है.
'मेरठ मामले में अंधविश्वास में भरोसा ने भी अहम भूमिका निभाई है. ये साहिल का ही बिलिफ सिस्टम था कि उसे सौरभ का 'वध' करना है, ऐसा उसने सोचा. ऐसे में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास का सहारा लेकर ऐसी हत्याएं करने पर भी कड़ा शिकंजा कसना चाहिए. मीडिया को भी ऐसे केसेज को सनसनीखेज बनाने से बचना चाहिए. '
-डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, मनोचिकित्सक, भोपाल
तो हल क्या है?
वहीं, सतीश सिंह का कहना है कि विवाह एक सामाजिक समझौता है, जिसमें से आसानी से बाहर निकलने का रास्ता नहीं है. विवाह को पूरी तरह खारिज करने के बजाय इसमें से सम्मानपूर्वक बाहर निकलने का रास्ता रहना चाहिए. ऐसे में महिलाएं पुरुषों को मार रही हैं, ये सिर्फ उन्हें बदनाम करने की कोशिश है. क्रूरता बढ़ती जा रही है कि समाज जिसमें महिला भी आ सकती है. आजकल महिला को विलेन बनाने की पूरी कोशिश चल रही है और इस केस ने ऐसा मौका भी दे दिया है.
'पुरुष केवल स्पर्म डोनर या पैसों की एटीएम मशीन नहीं है. आज जिस तरह से उनके खिलाफ मामले बढ़ रहे हैं. तो ऐसे में राज्य, समाज और न्यायापालिक तीनों को सोचने की जरूरत है. '
-बरखा त्रेहन, समाजसेविका, पुरुष आयोग
दिल्ली में पुरुष आयोग चलाने वाली बरखा त्रेहन कहती हैं कि आये दिन कभी कोई पुरुष पत्नी को मार देता है तो कभी कोई पत्नी किसी पुरुष को मार देती है. यहां लड़ाई पुरुष बनाम स्त्री नहीं बल्कि. बल्कि दोनों के बीच संतुलन लाने की बात की जानी चाहिए. जेंडर न्यूट्रल समाज बनाने के बारे में सोचना चाहिए. इस तरह की समस्याओं का हल नेता, कोर्ट और समाज के पास है. इस तरह के केसेज से बच्चे पर बुरा असर पड़ता है. अगर पति-पत्नी के बीच नहीं बन रही है तो म्युच्युल तलाक ले लेना चाहिए.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से जुड़ें.
- Log in to post comments

इश्क इतना 'कमीना' कि जीना मुश्किल! मेरठ हत्याकांड से लेकर जयपुर तक विलेन कौन? टॉक्सिक मर्दानगी या कुछ और?