27 फरवरी 2028 महाराष्ट्र के लिहाज से यह दिन खासा महत्वपूर्ण था. क्योंकि तमाम राजनीतिक दल 'मराठी भाषा दिवस' ​​(मराठा भाषा दिवस) को और भव्य बनाने के लिए खासे उत्साहित नजर आए. सवाल होगा कि क्या वाक़ई इससे उन लोगों को फायदा मिलेगा जो महाराष्ट्र में अपनी राजनीति चमकाने के अवसर तलाश रहे हैं? तो इसका जवाब हमें तब हां में दिखता है, जब अब इसे न केवल मराठी अस्मिता से जोड़ते हैं. बल्कि यह भी देखते हैं कि महाराष्ट्र की सियासत में मराठी कार्ड में ही वो शक्ति है जो राजा को रंक और रंक को राजा बना सकती है. 

जिक्र 27 फरवरी का हुआ है. तो यह दिन मराठी भाषा, साहित्य और संस्कृति का सम्मान करता है, जो प्रसिद्ध मराठी कवि और लेखक विष्णु वामन शिरवाडकर की 105वीं जयंती के साथ मेल खाता है, जिन्हें 'कुसुमाग्रज' के नाम से भी जाना जाता है.

दिलचस्प यह रहा कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों ने अपनी-अपनी पार्टियों द्वारा आयोजित पुस्तक मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया, जिससे मराठी गौरव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता प्रदर्शित हुई. 

इस बीच, महायुति के सहयोगियों ने राज्य सरकार और उनके संगठनों द्वारा नियोजित मराठी विरासत का जश्न मनाते हुए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए. शिवसेना और एनसीपी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों में विभाजन, साथ ही मुंबई के हृदयस्थल में मराठी आबादी में गिरावट, पहचान की राजनीति पर फलने-फूलने वाली पार्टियों के लिए एक बड़ी चिंता बन गई है.

हालांकि, राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मराठी गौरव और संस्कृति को संरक्षित करने में सबसे आगे होने का दावा किया है.

मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा, 'हम 'मराठी मानुष' को राजनीति से ऊपर रखते हैं, जबकि अन्य पार्टियां केवल वोट बैंक की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करती हैं. हमें वोटों के बंटवारे की परवाह नहीं है और हम अपने आदर्श वाक्य के लिए काम करना जारी रखेंगे.'

इस बीच, यूबीटी सेना के नेता और सांसद संजय राउत ने 'मराठी भाषा दिवस' के दिन ठाणे नगर निगम में मराठी स्नातक कर्मचारियों को वेतन वृद्धि से वंचित किए जाने का मुद्दा उठाया.

राउत ने मांग की कि एकनाथ शिंदे को जवाब देना चाहिए कि ठाणे के गढ़ में मराठी युवाओं के साथ अन्याय क्यों हो रहा है.

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि इन कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान किया जाएगा और उनमें से किसी के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा.

मराठी निष्ठा का यह जोशीला प्रदर्शन आगामी नगर निकाय चुनावों को देखते हुए रणनीतिक रूप से समयबद्ध है. 'मराठी कार्ड' के लिए प्रतिस्पर्धा तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि प्रत्येक पार्टी भाषा और संस्कृति के प्रति अपने समर्पण को प्रदर्शित करने में दूसरों से आगे निकलने का प्रयास कर रही है.

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Split in Shiv Sena NCP along with the declining Marathi population now Maratha card is only hope before Maharashtra civic polls
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव में आखिर कैसे 'मराठा कार्ड' से सेट की जा रही है बाजी? 
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले सभी दलों  की निगाहें मराठा अस्मिता पर हैं
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव में आखिर कैसे 'मराठा कार्ड' से सेट की जा रही है बाजी? 

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