Ramzan 2025: 28 फरवरी 2025 वो तारीख जो होने को तो एक आम सी तारीख है. लेकिन क्योंकि इस दिन से रमज़ान जो कि इस्लामिक कैलेंडर का नौंवा महीना है, जो शुरू हो रहा है. तो देश दुनिया के मुसलमानों के लिहाज से ये तारीख खासी अहम है. चाहे वो मरकजी चांद कमेटी फरंगी महल हो या फिर शिया चांद कमेटी दोनों ने ही इसकी तस्दीक़ कर दी है कि 28 फरवरी 2025 से रमज़ान के मुकद्दस और बेहद ख़ास महीने की शुरुआत होगी.
वो तमाम लोग जो इस्लाम के अनुयायी हैं और अपने को मुसलमान कहते हैं. जानते होंगे कि जैसे ही यह महीना शुरू होता है, चाहे उनका फेसबुक और इंस्टाग्राम हो या फिर व्हाट्सएप ऐसे तमाम बधाई संदेशों से पट जाता है. जिसमें लोग उन्हें इस महीने की मुबारकबाद देते हैं. कभी स्क्रीन पर उन्हें 'रमज़ान' मुबारक लिखा मिलता है तो कभी 'रमदान' मुबारक.
एक सवाल बहुत लंबे वक़्त से हमारे सामने है, वो ये कि 'रमज़ान' या 'रमदान' आखिर इन दोनों में सही या ये कहें कि शुद्ध कौन है? भले ही बुद्धिजीवियों और अपने को एलीट कहने वालों में इस शब्द को लेकर मतभेद हो मगर इन दो शब्दों के प्रति इस्लाम के जानकारों का एजेंडा बहुत क्लियर है.
आगे कुछ बात हो उससे पहले हमारे लिए यह बता देना बहुत जरूरी हो जाता है कि 'रमज़ान' या 'रमदान' अपनी-अपनी पर ये दोनों ही शब्द सही हैं और अगर इनमें अंतर है तो वो सिर्फ और सिर्फ भूगोल का है. जी हां हैरान होने की कोई ज़रुरत नहीं है. आपने जो सुना बिलकुल सही सुना.
रमज़ान और रमदान वाले बवाल की क्या है असल वजह
रमज़ान और रमदान को लेकर जारी फसाद की जड़ फारसी और अरबी वर्णमाला है. ध्यान रहे कि रमजान फारसी का शब्द है जिसने उर्दू में जगह पाई और प्रचलन में आया, जबकि रमदान पूर्णतः अरबी का लफ़्ज़ है. ज्ञात हो कि अरबी में रमज़ान शब्द लिखने के लिए 'ज्वाद' अक्षर का इस्तेमाल होता है.
भाषा के तमाम जानकार ऐसे हैं जिनका मानना है कि 'ज्वाद' बोलने में 'ज़ेड' (Z) की जगह 'डे' (D) की आवाज़ आती है. इसलिए, अरबी बोलने वाले लोग रमदान कहते हैं और चूंकि भारत में फ़ारसी का प्रभाव ज़्यादा रहा है, इसलिए भारत में रमज़ान कहते हैं.
वहीं मुस्लिम धर्मगुरु दोनों ही शब्दों को सही बताते हैं. यूं तो भारतीय उपमहाद्वीप में रमज़ान ही कहा जाता रहा है, लेकिन मध्य पूर्व के चलते पिछले सालों में भारत में रमदान कहने के चलन में इजाफा देखने को मिला है.
क्या है रमज़ान का अर्थ
रमज़ान को लेकर मान्यता यह है कि यही वो पाक महीना है जब क़ुरान नाज़िल हुई थी. बात अगर इस शब्द के अर्थ की हो तो इसका अर्थ है 'तेज़ या फिर तपती हुई गर्मी' इस दौरान मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक निराहार व्रत करते हैं और सूरज डूब जाने के बाद इफ़्तार के बाद ही कुछ खाते पीते हैं.
चूंकि यह महीना आत्मचिंतन और गरीबों के दर्द को समझने का है. इसलिए यह महीना यह सिखाता है कि हमें दान करना चाहिए और मिथ्या और झूठ से बचकर चलते हुए अपने में सकारात्मक आदतें विकसित करनी चाहिए.
इस्लाम के तमाम जानकार ऐसे हैं जो इस बात पर बल देते हैं कि रोजे पापों से प्रायश्चित का एक माध्यम तो हैं ही साथ ही इस दौरान इंसान संयम भी सीखता है. ध्यान रहे कि रोजे के दौरान आंख, कान, नाक, जुबान और मुंह को भी नियंत्रित करना होता है.
बहरहाल, अब शायद उपरोक्त लेख से यह स्पष्ट हो गया हो कि चाहे वो रमज़ान हो या फिर रमदान दोनों एक हैं और इसपर जारी विवाद व्यर्थ है. रमजान का असल उद्देश्य इंसान को एक ऐसा बेहतर इंसान बनाना है जिसका तन और मन दोनों ही शुद्ध हो और जो अपने को बुराइयों, झूठ, मिथ्या से दूर रखे और जिसके दिल में दूसरों के लिए सम्मान और करुणा हो.
ख़बर की और जानकारी के लिए डाउनलोड करें DNA App, अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.
- Log in to post comments

'रमज़ान' या 'रमदान' क्या सही, क्या गलत? आइये समझें क्या है मैटर, जानें कहां से हुआ बवाल शुरू...