'लुटेरे की याद में मेला बिल्कुल नहीं लगेगा. अगर लगा तो आप राष्ट्रद्रोही हैं. अगर इस देश के हैं, तो ऐसी इजाजत नहीं मांगेंगे.'

ये कड़क शब्द हैं संभल के एडिशनल एसपी श्रीश चंद्र के. उन्होंने डंके की चोट पर संभल में लगने वाले नेजा मेला का विरोध किया और कहा कि आप ही कह रहे हैं कि सोमनाथ को लूटा था, तो ऐसे आदमी की याद में आप कार्यक्रम क्‍यों कर रहे हैं. बिल्कुल नहीं होगा, बिल्कुल नहीं होगा... फिर भी आपको लगता है कि नेजा मेला लगाना है, तो पहले जाकर एप्लिकेशन दीजिएगा.' संभल पुलिस का साफ कहना है कि जिस सालार गाजी एक लुटेरा था और लुटेरे की याद में मेला लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. 

संभल में क्या है विवाद?

संभल में लगातार एक न एक विवाद बढ़ते जा रहे हैं. पहले रमजान फिर होली और अब 'नेजा मेला.' नेजा मेले के लिए झंडा 18 मार्च को गाड़ा जाना था. इसके बाद मेला कमेटी ने 25, 26 और 27 मार्च को मेला लगाने का ऐलान किया था. मेला लगाने वाली कमेटी ने जब एएसपी श्रीशचंद्र से मुलाकात की तो उन्होंने कहा कि सालार मसूद गाजी एक लुटेरा और आंक्रांता था. अब ऐसी कुरीतियों को खत्म करना चाहिए और सोमनाथ मंदिर के लुटेरे की याद में नेजा मेला नहीं लगेगा.  

कौन था सालार मसूद गाजी?

सैयद सालार मसूद गाजी मोहम्मद गजनवी का भांजा था. गजनवी ने उसे अपना सेनापति बनाया था. उसे गाजी (धर्मयोद्धा) कहा जाता है. वह 11वीं सदी में भारत आया था. कहा जाता है कि उसने भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी विजय अभियानों में भाग लिया और कई स्थानों पर लड़ाइयां लड़ीं. 

किंवदंतियों के अनुसार, सालार मसूद ने संभल सहित कई क्षेत्रों में अपनी सेना भेजी थी. सैयद सालार ने सबसे बड़ा हमला सोमनाथ मंदिर काठियावाड़ पर किया था. 1026 ई. में हुए इस हमले को हिंदुओं की आस्था पर सबसे बड़ी चोट कहा गया. सैयद सालार हिन्दुस्तान में हमले करते हुए 1033 ई. में उत्तर प्रदेश के बहराइच पहुंचा. उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में उसने राजाओं को ललकारा और लूट मचाने की कोशिश की. सैयद सालार का सामना श्रावस्ती के महाराजा सुहेलदेव राजभर से हुआ. उन्होंने उस दौर के 21 राजाओं के साथ मिलकर एक संयुक्त सेना तैयार की.

सैयद सालार और राजाओं की संयुक्त सेना के बीच भीषण जंग हुई. महाराजा सुहेलदेव ने सालार को करारी शिकस्त दी. जंग में हार के साथ उसे जान भी गंवानी पड़ी.


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संभल में क्यों लगता है ये मेला?

संभल में गाजी मसूद के नाम पर एक दरगाह है, जहां हर साल एक विशेष मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चादर चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है. इस मेले को नेजा मेला कहा जाता है. इस साल भी ये लगने वाला था लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी.  

 

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कौन था सालार मसूद गाजी, जिसके नाम पर संभल में लगता है मेला
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कौन था सालार मसूद गाजी, जिसके नाम पर संभल में लगता है मेला, प्रशासन ने क्यों लगाई रोक?

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